Sri Ramraksha Stotra PDF in Hindi Download

श्री राम रक्षा स्तोत्रम् Ram Raksha Stotra Hindi pdf Ram Raksha Stotra lyrics in Hindi pdf श्री राम रक्षा स्तोत्रम् हिंदी में Sri Ramraksha Stotra PDF in Hindi

Ramraksha Stotra PDF in Hindi- राम रक्षा स्तोत्र ऋषि कौशिक द्वारा रचित है। सभी प्रकार की बाधाओं और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए इस स्तोत्र का पाठ किया जाता है। इस स्तोत्र का पाठ नवग्रहों के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए भी किया जाता है। यहाँ राम रक्षा स्तोत्र हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। इस महान फलदायी स्तोत्र का पाठ कम से कम ग्यारह बार और हो सके तो नियमित रूप से प्रतिदिन करना चाहिये.

नमस्कार मित्रों, आज हमारे द्वारा आपको यहाँ पर Sri Ramraksha Stotra के बारे में बताया जायेगा और इसे किस पारकर किया जाता है इसके बारे में भी चर्चा की जाएगी . यहाँ पर आपको Ramraksha Stotra PDF in Hindi Download Link भी दी जाएगी ताकि आप ऑनलाइन ही श्री राम रक्षा स्तोत्रम् हिंदी में प्राप्त कर सकें.

Sri Ramraksha Stotra PDF in Hindi

आपको बता दें कि श्री राम रक्षा स्तोत्र की उत्पत्ति से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता है, जिसके अनुसार एक दिन भगवान शंकर ने स्वप्न में बुद्धकौशिक ऋषि को दर्शन दिए और उन्हें राम रक्षा स्तोत्र सुनाया। सुबह उठकर ऋषि ने यह स्रोत लिख दिया। यह स्रोत संस्कृत में है और इसका पाठ बहुत प्रभावी माना जाता है। और उचित विधि से पाठ करने पर यह बहुत फलदायी साबित होता है .

राम रक्षा स्तोत्र पीडीएफ फाइल

PDF Name श्री राम रक्षा स्तोत्र
No. of Pages 20
PDF Size 2 MB
Category धार्मिक
Language हिंदी/संस्कृत
Download Link नीचे देखें

Ramraksha Stotra PDF Download

श्री राम स्तोत्र के महत्व क्या है ?

किसी भी धार्मिक पाठ का आयोजन और पूजा विधि को सही ढंग से करने के बाद इसके ऐसे बहुत से लाभ और महत्व होते है जिनसे की आपको उचित फल मिलता है . श्री राम स्तोत्र के महत्व निम्न है-:

  • राम रक्षा स्तोत्र का पाठ जातक को सभी प्रकार की विपदाओं से बचाता है।
  • इसका पाठ करने से व्यक्ति निडर हो जाता है।
  • इसका नियमित पाठ करने से कष्ट दूर होते हैं।
  • जो व्यक्ति इसका नित्य पाठ करता है, वह दीर्घायु, सुख, संतान, विजयी और नम्रता का आशीर्वाद प्राप्त करता है।
  • मंगल का अशुभ प्रभाव समाप्त होता है।
  • इसके शुभ प्रभाव से व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा कवच का निर्माण होता है, जो सभी प्रकार की विपदाओं से रक्षा करता है।
  • श्री राम स्तोत्र के बारे में कहा जाता है कि इसके पाठ से पवनपुत्र हनुमान भी भगवान राम से प्रसन्न होते हैं।

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राम स्तोत्र पूजा विधि और विनियोग

श्री रामचन्द्र जी की प्रसन्नता के लिए राम रक्षा स्त्रोत के जप में विनियोग किया जाता है . ये पूजा विधि और विनियोग विधि निम्न है -:

विनियोग – ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपदमासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमल दल स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम। वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनम् नीरदाभम् नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलम् रामचंद्रम ।।

पूजा विधि – राम स्त्रोत की पूजा विधि के लिए आपको ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ,नित्य कर्मों से निवृत होकर,शुद्ध वस्त्र धारण करने होंगे . इसके बाद कुषा के आसन पर सुखासन लगाकर बैठ जाइये . इसके बाद श्री राम जी के कल्याणकारी स्वरूप को मन में एकाग्र करके ,एक हाथ में थोडा जल लेकर इस महँ और कल्याणकारी श्री राम स्त्रोत का पाठ करे , ध्यान रहें पाठ की शुरुआत विनियोग से करे .

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श्री राम स्तोत्र पीडीएफ संस्कृत में डाउनलोड करे

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राम स्तोत्र अर्थ हिंदी में

श्री रघुनाथजी का चरित्र सौ करोड़ विस्तार वाला हैं। उसका एक-एक अक्षर महापातकों को नष्ट करने वाला (करता) है। नीले कमल के श्याम वर्ण वाले, कमल नेत्र वाले , जटाओं के मुकुट से सुशोभित, जानकी तथा लक्ष्मण सहित ऐसे भगवान श्री राम का स्मरण करके,जो अजन्मा (जिनका जन्म न हुआ हो, अर्थात जो प्रकट हुए हों), एवं सर्वव्यापक, हाथों में खड्ग, तुणीर, धनुष-बाण धारण किए राक्षसों के संहार तथा अपनी लीलाओं से जगत रक्षा हेतु अवतीर्ण श्रीराम का स्मरण करके,मैं सभी कामनाओं की पूर्ति करने वाले और समस्त पापों का नाश करने वाले राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करता हूँ। राघव मेरे सिर की और दशरथ के पुत्र मेरे ललाट की रक्षा करे.

कौशल्या नंदन मेरे नेत्रों की, विश्वामित्र के प्रिय मेरे कानों की, यज्ञ रक्षक मेरे घ्राण (नाक) की और सुमित्रा के वत्सल मेरे मुख की रक्षा करें। मेरी जिह्वा की विधानिधि रक्षा करें, भरत-वन्दित मेरे कंठ की रक्षा करें, कंधों की दिव्यायुध और भुजाओं की महादेव का धनुष तोड़ने वाले भगवान श्रीराम रक्षा करें। मेरे हाथों की सीता पति श्रीराम रक्षा करें, हृदय की जमदग्नि ऋषि के पुत्र (परशुराम) को जीतने वाले, मध्य भाग की खर (राक्षस) के वधकर्ता और नाभि की जांबवान के आश्रयदाता रक्षा करें मेरे कमर की सुग्रीव के स्वामी, हडियों की हनुमान के प्रभु और सभी रघुओं में उत्तम और राक्षसकुल का विनाश करने वाले श्री राम जाँघों की रक्षा करें

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सेतु का निर्माण करने वाले मेरे घुटनों की, दशानन का वध करने वाले मेरी अग्रजंघा की, विभीषण को ऐश्वर्य देने वाले मेरे चरणों की और सम्पूर्ण शरीर की श्री राम रक्षा करें। शुभ कार्य करने वाला जो भक्त भक्ति एवं श्रद्धा के साथ रामबल से संयुक्त होकर इस स्तोत्र का पाठ करता हैं, वह दीर्घायु, सुखी, पुत्रवान, विजयी और विनयशील हो जाता हैं जो जीव पाताल, पृथ्वी और आकाश में विचरते रहते हैं अथवा छद्म वेश में घूमते रहते हैं , वे राम नामों से सुरक्षित मनुष्य को देख भी नहीं राम, रामभद्र तथा रामचंद्र आदि नामों का स्मरण करने वाला रामभक्त पापों से लिप्त नहीं होता, इतना ही नहीं, वह अवश्य ही भक्ति और मोक्ष दोनों को प्राप्त करता है।

जो राम नाम से सुरक्षित जगत पर विजय करने वाले इस मन्त्र को अपने कंठ में धारण करता है, उसे सम्पूर्ण सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती हैं। जो मनुष्य वज्रपंजर नामक इस राम कवच का स्मरण करता हैं, उसकी आज्ञा का कहीं भी उल्लंघन नहीं होता तथा उसे सदैव विजय और मंगल की ही प्राप्ति होती हैं।स्वप्न में बुधकौशिक ऋषि को भगवान शिव का आदेश होने पर बुधकौशिक ऋषि ने प्रातः जागने पर इस स्तोत्र को लिखा।

जो कल्प वृक्षों के बगीचे के समान विश्राम देने वाले हैं, जो समस्त विपत्तियों को दूर करने वाले हैं (विराम माने थमा देना, किसको थमा देना/दूर कर देना ? सकलापदाम = सकल आपदा = सारी विपत्तियों को) और जो तीनो लोकों में सुंदर (अभिराम + स्+ त्रिलोकानाम) हैं, वही श्रीमान राम हमारे प्रभु हैं।जो युवा, सुन्दर, सुकुमार, महाबली और कमल (पुण्डरीक) के समान विशाल नेत्रों वाले हैं, मुनियों की तरह वस्त्र एवं काले मृग का चर्म धारण करते हैं। जो फल और कंद का आहार ग्रहण करते हैं, जो संयमी , तपस्वी एवं ब्रह्मचारी हैं , वे दशरथ के पुत्र राम और लक्ष्मण दोनों भाई हमारी रक्षा करें।

ऐसे महाबली रघुश्रेष्ठ मर्यादा पुरूषोतम समस्त प्राणियों के शरणदाता, सभी धनुर्धारियों में श्रेष्ठ और राक्षसों के कुलों का समूल नाश करने में समर्थ हमारी रक्षा करें। संघान किए धनुष धारण किए, बाण का स्पर्श कर रहे, अक्षय बाणों से युक्त तुणीर धारण किये हुए राम और लक्ष्मण मेरी रक्षा करने के लिए मेरे आगे चलें।

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हमेशा तत्पर, कवचधारी, हाथ में खडग, धनुष-बाण धारण किये युवावस्था वाले भगवान राम लक्ष्मण सहित आगे आगे चलकर हमारी रक्षा करें। भगवान शिव का कथन है कीआदि नामों का नित्यप्रति श्रद्धापूर्वक जप करने वाले को निश्चित रूप से अश्वमेध यज्ञ से भी अधिक फल प्राप्त होता हैं इसमें कोई  दूर्वादल के समान श्याम वर्ण, कमल-नयन एवं पीतांबरधारी श्रीराम की उपरोक्त दिव्य नामों से स्तुति करने वाला संसार चक्र में नहीं पड़ता।

लक्ष्मण के बड़े भाई रघुवर, सीता जी के पति, काकुत्स्थ राजा के वंशज, करुणा के सागर, गुण-निधान, विप्रों (ब्राह्मणों) के प्रिय, परम धार्मिक (धर्म के रक्षक), राजराजेश्वर (राजाओं के राजा), सत्यनिष्ठ, दशरथ के पुत्र, श्यामवर्ण, शान्ति स्वरुप, सम्पूर्ण लोकों में सुन्दर, रघुकुल तिलक, राघव एवं रावण के शत्रु भगवान राम की मैं वंदना करता हूँ। राम, रामभद्र, रामचंद्र, विधात स्वरूप, रघुनाथ प्रभु एवं सीता जी के स्वामी की मैं वंदना करता हूँ।

हे रघुनन्दन श्रीराम ! हे भरत के अग्रज (बड़े भाई) भगवान राम! हे रणधीर, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ! आप मुझे शरण दीजिए। मैं एकाग्र मन से श्रीरामचंद्रजी के चरणों का स्मरण करता हूँ और श्रीराम के चरणों का वाणी से गुणगान करता हूँ, वाणी द्धारा और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान रामचन्द्र के चरणों को प्रणाम करता हुआ मैं उनके चरणों की शरण लेता हूँ। श्रीराम मेरे माता, मेरे पिता , मेरे स्वामी और मेरे सखा हैं । इस प्रकार दयालु श्रीराम मेरे सर्वस्व हैं। उनके सिवा में किसी दुसरे को नहीं जानता।

जिनके दक्षिण में (दाई ओर) लक्ष्मण जी, बाई ओर जानकी जी और सामने हनुमान ही विराजमान हैं, मैं उन्ही रघुनाथ जी की वंदना करता हूँ. मैं सम्पूर्ण लोकों में सुन्दर तथा युद्धकला में धीर, कमल के समान नेत्र वाले, रघुवंश नायक, करुणा की मूर्ति और करुणा के भण्डार की श्रीराम की शरण में हूँ।

मन के समान गति और वायु के सामान वेग (अत्यंत तेज) वाले, जो परम जितेन्द्रिय एवं बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, वायु के पुत्र, वानर दल के अधिनायक श्रीराम दूत (हनुमान) की मैं शरण लेता हूँ।
 मैं कवितामयी डाली पर बैठकर, मधुर अक्षरों वाले ‘राम-राम’ के मधुर नाम को कूजते हुए वाल्मी मैं सभी लोकों में सुन्दर श्री राम को बार-बार प्रणाम करता हूँ, जो सभी आपदाओं को दूर करने वाले तथा सुख सम्पति प्रदान करने वाले हैं। ‘राम-राम’ का जप करने से मनुष्य के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। वह समस्त सुख सम्पति तथा ऐश्वर्य प्राप्त कर लेता हैं। राम राम की गर्जना से यमदूत सदा भयभीत रहते हैं।
 राजाओं में श्रेष्ठ श्रीराम सदा विजय को प्राप्त करते हैं। मैं लक्ष्मीपति भगवान श्रीराम का भजन करता हूँ। सम्पूर्ण राक्षस सेना का नाश करने वाले श्रीराम को मैं नमस्कार करता हूँ। श्रीराम के समान अन्य कोई आश्रयदाता नहीं। मैं उन शरणागत वत्सल का दास हूँ। मैं हमेशा श्रीराम मैं ही लीन रहूँ। हे श्रीराम! आप मेरा (इस संसार सागर से) उद्धार करें।
 (शिवजी पार्वती से कहते हैं) हे सुमुखी ! राम- नाम ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ के समान हैं। मैं सदा राम का स्तवन करता हूँ और राम नाम में ही रमण करता हूँ।

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